गुरुवार, 24 नवंबर 2011

KNOW GARLIC AS DRUG WITH VIPUL: लहसुन को औषधि के रूप में जाने विपुल सिंह के साथ

KNOW GARLIC AS DRUG WITH VIPUL: लहसुन को औषधि के रूप में जाने विपुल सिंह के साथ: लहसुन को औषधि के रूप में जाने लहसुन, प्याज के परिवार का एक कंद है लहसुन का प्र...

लहसुन को औषधि के रूप में जाने विपुल सिंह के साथ

                                                        लहसुन को औषधि के रूप में जाने


लहसुन, प्याज के परिवार का एक कंद है लहसुन का प्रयोग भारतीय रसोईघर में सदियों से होता आया है लहसुन भारतीय रसोई में प्रयोग किया जाने वाला एक प्रमुख मसाला है।यह भोजन को रुचिकर और स्वास्थवर्धक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे तेल, अवलेह, भस्म, खोया बनाकर, लहसुन कल्प कर, खीर बनाकर, छोंक लगाकर, हरी या सूखी अवस्था में चटनी, अचार बनाकर काम में लिया जाता है। आधुनिक युग में भी इसकी महत्वता को नकारा नहीं जा सकता।

प्रतिदिन लहसुन की एक कली के सेवन से शरीर को विटामिन ए, बी और सी के साथ आयोडीन, आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे कई पोषक तत्व एक साथ मिल जाते हैं।एक पायलट स्टडी से यह साबित हो गया है कि लहसुन में कैंसर से लड़ने की ताकत होती है, क्योंकि यह भोजन या प्रदूषण से शरीर में बनने वाले नाइट्रोसेमाइन के असर को कम करता है। एनालिटिकल बायोकेमिस्ट्री जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक नाइट्रोसेमाइन का संबंध कैंसर से होता है।
सब्जियों, पैकेज्ड फूड और इंडस्ट्री से निकलने वाले कचरे में नाइट्रेट की मात्रा होती है। करीब 20 पर्सेंट नाइट्रेट शरीर में जाकर नाइट्रोसेमाइन में बदल जाता है। विदेशों में भी इस बात की पुष्टि हो गई है कि लहसुन रक्तचाप को भी काबू में कर सकता है।
म्यूनिख रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉ. स्ट्रीफोर्ड ने अपने गहन शोध निष्कर्ष में इसे खुदा की खास नियामत ठहराते हुए दिल, दिमाग और पूरे शरीर के लिए एक शक्तिशाली टॉनिक बताया है।
दो कलियां लहसुन की पीसकर एक गिलास दूध में उबल ले व ठंडा करके सुबह शाम कुछ दिन पिए हृदय के रोगों में आराम मिलता है।लहसुन के नियमित सेवन पेट और भोजन की नली का कैंसर और स्तन कैंसर की सम्भावना को कम कर देताहै।
सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए शोधों में यह पता चला है कि लहसुन और प्याज में मौजूद कुछ यौगिकों से अनाज से आयरन और जिंक ग्रहण करने की क्षमता सात गुना अधिक बढ़ जाती है।
लहसुन और प्याज सल्फर यौगिकों के मुख्य स्रोत हैं, जो कि भोजन से जिंक और आयरन को अधिक ग्रहण करने में सहायक हैं।यह वर्ध्दी 50 से 70 प्रतिशत होती है। यदि आप करी में लहसुन-प्याज का छोंक लगाते हैं तो वह स्वादिष्ट होने के साथ आपके लिए सेहतमंद भी होगी।आम तोर पर लहसुन के बारे मेंलहसुन की लाभदायक जानकारी होने के बाद भी लोग लहसुन के गंध के कारण इसे खाने से परहेज करते हैं। लेकिन प्रकृति की इस अनमोल  देन को अच्छे स्वास्थ  और बिमारियों  से लड़ने की प्रतिरोधी क्षमता के लिए भोजन में शामिल करना, अंग्रेजी  दवाइयों से ज्यादा अच्छा होगा।चमत्कारिक गुणों वाली कई औषधियों का रोजाना इस्तेमाल हमारी रसोई  से ही  होता है।
कच्चे लहसुन में अल्लीसिन नमक तत्व होता है,यह वायरस को नष्ट कर देता है इस अल्लीसिन ( Allicin ) तत्व से  23 प्रकार के बैक्टीरिया को समाप्त करने में सफलता मिली है लहसुन भी छोटी चेचक, खसरा, कण्ठमाला का रोग, स्कार्लेट ज्वर और अन्य वायरल संक्रमण को नष्ट कर देता है।हर रोज के लिये आप लहसुन को पीसकर दही में मिलाकर खाये तो आपके मुंह से बदबू नहीं आयेगी। या जरा सा गुड़ और सूखा धनिया मिलाकर मुंह में डालकर चूसें कुछ देर में ही मुंहू से दुर्गन्ध नहीं आयेगी।
अपने स्वास्थ को ध्यान में रखते हुऐ लहसुन जरूर खायें। साग सब्जी में लहसुन का तड़का लगाने से भी इसके गुण नष्ट नहीं होते।नियमित लहसुन खाने से ब्लडप्रेशर नियमित होता है। एसिडिटी और गैस्टिक ट्रबल में इसका प्रयोग फायदेमंद होता है। दिल की बीमारियों के साथ यह तनाव को भी नियंत्रित करती है। हर रोज नियमित रूप से लहसुन की पाँच कलियाँ खाई जाएँ तो हृदय संबंधी रोगों की संभावना में कमी आती है।
कोलेस्ट्रॉल के स्तर में भी  कमी आती है। खून भी साफ होता है और शरीर के अंदरूनी सिस्टम की सफाई भी होती है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि लहसुन शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड बनने की प्रक्रिया को तेज करता है। ये रसायन रक्त संचार को नियमित करता है जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
विषैले कीड़ों के काटने से होने वाली जलन को कम करने के लिए लहसुन को पीसकर त्वचा पर लेप करे।
बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लहसुन को पीसकर  दूध में उबालकर पिलाये।
लहसुन की कलियों को तव्वे पर  भून कर बच्चों  को खिलाने से बच्चो की साँस की तकलीफ को दूर किया जा सकता है।
गठिया और अन्य जोड़ों के रोग में भी लहसुन का सेवन बहुत ही उपयोगी होता है।
फ्लू  से लेकर कैंसर जैसी बड़ी बीमारी के इलाज में भी लहसुन सहायक होता है।
लहसुन के सेवन से पेट का कैंसर नहीं होतालहसुन में एंटीऑक्सिडेंट के भरपूर गुण होते हैं कैंसर के इलाज में लहसुन का बड़ा महत्व है।
 चिकित्सीय शोध बताते हैं कि लहसुन का नियमित सेवन करने वाले लोगों को कैंसर होने की संभावनाएं काफी कम हो जाती है।
लहसुन कीटाणुनाशक है। लहसुन का नियमित सेवन करने वालों को तपेदिक यानी टीबी रोग नहीं होता। एंटीबायोटिक गुणों के कारण लहसुन से टी बी के कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं। इसके लिए भोजन करने  के आधा घंटे बाद एक मनुक्का और एक लहसुन की  कली को मुँह में रख कर धीरे-धीरे अच्छी तरह से चबाएँ और ऊपर से पानी पी लें।
मुँहासे के लिए लहसुन की दो कलियों  को  और एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिला कर क्रीम बना ले इसे  मुहासों पर और चेहरे पर लगाये।वायरस और बैक्टीरिया से बचने के लिए ताजा लहसुन खाना अधिक फायदेमंद होता है।
इसके एंटीबैक्टीरियल गुण इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं।
इन्फ्लूएंजा में एक-एक लहसुन का रस पानी में मिलाकर दिन में दो तीन बार रोगी को  दें। मलेरिया के रोगी को भोजन से पहले तिल के तेल में भुना लहसुन खिलाना चाहिए।लहसुन का इस्तेमाल एंटीसेप्टिक के रूप में भी किया जा सकता है।
हृदय संबंधी विकारों को कम करने के लिए लहसुन को भोजन में शामिल करना जरूरी माना जाता है।यदि रोगी कच्चे लहसुन की कलियां खा सके तो पानी के साथ इसका सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित होता है। हृदय संबंधी विकारों को कम करने के लिए लहसुन को भोजन में शामिल करना जरूरी माना जाता है।
वैज्ञानिकों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है कि लगातार चार हफ्ते तक लहसुन खाने से कॉलेस्ट्रोल का स्तर 12 प्रतिशत तक या उससे भी कम हो सकता है।लहसुन में पाया जाने वाला सल्फाइड्स रक्तचाप को कम करने में मदद करता है। वे सल्फाइड्स लहसुन को पकाने के दौरान भी नष्ट नहीं होते हैं। यानी सब्जी, दाल में जब आप लहसुन का छौंक लगाती हैं, तब भी उसका ये गुण नष्ट नहीं होता।
दाँत का दर्द होने पर या मसूढ़े फूलने पर लहसुन को पीसकर उसकी धीरे-धीरे मालिश करनी चाहिए इससे दांत दर्द से रहत मिलेगी ।ठंड के मौसम में होने वाले सर्दी, जुकाम और कफ बनने की समस्या से राहत पाने के लिए नियमित रूप से लहसुन का सेवन करना जरूरी है। ठंड के शुरुआत में लहसुन की दो कलियों  को कुचल कर एक लौंग मिला कर खाने से ठंड से बचाव होता है।
खांसी के इलाज के लिए लहसुन अचूक औषधि है,कुक्कर खांसी के होने पर 20 - 25 बूंदें लहसुन का रस अनार के जूस में मिलाकर पिएं। इससे शीघ्र लाभ होता है। लहसुन का तेल सवेरे निराहार पानी के साथ पीने से पुरानी से पुरानी खाँसी में  फायदा होता है।
अदरक, नींबू, नमक, जीरा, सौंफ, अनारदाना, लहसुन की चटनी पीसकर खाँसी, दमा, कफजन्य रोगों से ग्रस्त को चटाना चाहिए। इससे बलगम  भी निकल जाता है।
अल्सर में भी लहसुन के उपयोग से फायदा होता है।
लहसुन खाने से भूख भी अच्छी लगती है।
लहसुन डायबिटीज के लिए भी गुणकारी साबित हुआ है, रक्त में शक्कर के स्तर को नियमित करता है। मधुमेह के रोगियों को प्रातः निराहार ही त्रिफला और 20 -25 ग्राम लहसुन का रस कुछ दिन तक लगातार लेना चाहिए।दस्तो  में 10 ग्राम लहसुन का रस मट्ठे में मिलाकर सुबह, दोपहर, शाम कुछ दिनों तक लें। रस हर बार ताजा निकालें। निश्चित रूप से लाभ होगा।जी मचलने पर लहसुन की एक दो कलीयाँ चबाये रोगी को आराम मिलेगा।
पक्षाघात यानि के लकवा में माँसपेशियों के पुनः सक्रिय करने में लहसुन के ताजा रस की मालिश करने से प्रभावित माँसपेशियों पुनः सक्रिय होने लगती है।
इसके साथ साथ लहसुन को पीस कर चटनी बना ले और इसमें बराबर मात्रा में मख्खन मिला कर पक्षाघात के रोगी को सुबह शाम खाने को देने से पक्षाघात के रोगी को निश्चित तोर पर धीरे-धीरे लाभ होगा।सरसों या तिल के तेल में लहसुन का रस मिलाकर थोड़ा गरम करके इसे प्रभावित हिस्से पर लगा कर हल्के हलके मालिश करें, इससे पक्षाघात में काफी फायदा होता है और रक्त संचार नियमित होता है।"डेलीमेल डॉट को डॉट यूके" पर प्रकाशित जानकारी के अनुसार लहसुन परिवार (लहसुन और प्याज ) की सब्जियों का अधिक सेवन करने वाली महिलाओं में कमर में ऑस्टियोआर्थराइटिस की आशंका कम होती है और गठिया का खतरा कम हो सकता है।
सावधानी :- गठिया के रोगी लाल सब्जियां न खाएं।मधुमेह के स्तर को काबू में रखने के लिए और शरीर को दरुस्त व छरहरा रखने के लिए भोजन में शतावरी, वज्रांगी और लहसुन को शामिल करना चाहिए।शोधकर्ताओं ने पाया है कि लहसुन, शतावरी और वज्रांगी में प्रचुर मात्रा में काबरेहाइड्रेट होता है जिसका सेवन करने से भूख नियमित हो जाती है और इसके प्रयोग से मानव शरीर में मधुमेह के स्तर को नियंत्रित करने में  मदद मिलती है। साँप तथा बिच्छू के जहर को उतारने के लिए काटे जाने वाले स्थान पर लहसुन को  पीसकर इसका  लेप जहर से पूरे प्रभावित हिस्से पर लगाएँ और पट्टी बाँध दे जहर उतर जाएगा। बिच्छू के काटने वाले  स्थान पर लहसुन और अमचूर पीसकर लगाए जहर उतर जाएगा।पेशाब रुकने पर पेट के निचले भाग में लहसुन की पुल्टिस बाँधने से मूत्राशय की निषक्रियता दूर होती है।लहसुन से गैस्टिक एवं अपच की शिकायत दूर होती है. पाचन शक्ति अच्छी रहती है. यह अंतड़ियों में रुकी हवा निकाल देता है।शरीर में कैलि्शयम की कमी की भरपाई भी लहसुन के नियमित सेवन से होता है। कृमि नष्ट होते हैं। शरीर में गर्मी, चेहरे पर चमक रहती हैं।लहसुन का लेप दमा, गठिया, सियाटिका चर्म रोगों तथा कुष्ठ में करते हैं। लहसुन उत्तेजक और चर्मदाहक होता है। चर्मरोग व  दाद, खुजली में लहसुन के तेल का लेप आराम देता है। सावधानी :-एलर्जी महसूस करने वाले इसे ना खाएं और न ही त्वचा पर लगाएं।लहसुन खाने से नपुंसकता रोग में लाभ मिलता है। यह रक्त, ताक़त और वीर्य बढ़ाने वाला है।लगभग 50 ग्राम सरसों के तेल में लहसुन की चार कलियाँ डाल दें। उसमें 3 ग्राम अजवाइन डालकर धीमी-धीमी आँच पर पकाएँ। लहसुन और अजवाइन काली हो जाने पर  तेल उतारकर छान लें। इस गुनगुने तेल की मालिश बदन पर करें , हर प्रकार का बदन  दर्द और  जोड़ों के दर्द में भी इस तेल की मालिश से लाफ होगा।बाह्य प्रयोगों में यह कड़ी गाँठ को भी गला देता है लहसुन की पुल्टिस को किसी भी सूजे भाग पर बाँधने या ताजा रस रगड़ने से सूजन मिटती है। प्रतिदिन लहसुन की एक कली के सेवन से शरीर को विटामिन ए, बी और सी के साथ आयोडीन, आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे कई पोषक तत्व एक साथ मिल जाते हैं। इसके प्रतिदिन नियमित प्रयोग से आंखों की रोशनी के लिए भी कारगर माना जाता है।पैरों में  गांठे (कोर्नस होने पर जैतून के तेल और लहसुन के रस को समान मात्रा में मिला कर कोर्नस (काल्लुसेस पर मालिश करने से कोर्नस में आराम मिलेगा।लहसुन की दो कच्ची कलिओ को खली पेट सुबह-शाम लेने से  स्वप्न दोष से छुटकारा पाया जा सकता है|लहसुन बादी कम करने वाला होता है, इसीलिए बैंगन गोभी और उड़द की दाल में डालने की सलाह दी जाती है।गला बैठ रहा हो तो गुनगुने  पानी में लहसुन का रस मिलाकर गरारे करें, गला ठीक होगा।कान दर्द  में लहसुन और अदरक बराबर मात्रा में लेकर इसे अच्छी तरह से पीस ले और कपड़े से छान लें।इसे गुनगुना गर्म करके  कान में डालें,कान दर्द में आराम आएगा।लहसुन को तिल्ली के तेल में पका कर ठंडा होने पर कान के दर्द में इस्तेमाल करें, तुरंत असर होगा।लहसुन दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। लहसुन के रस को गर्म पानी के साथ लेने से श्वास, दमा में आराम मिलता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पाँच कलियाँ उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे के शुरुआती दोर में काफी फायदा मिलता है। अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियाँ मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सुबह शाम इस चाय का सेवन करने से रोग में फायदा होता है।किसानो के लिए :-अगर दूध देने वाली गाय-भैंसों के चारे में लहसुन मिला दिया जाए तो वे ज्यादा दूध देती हैं ।सावधानियां:-बेशक लहसुन कुदरती खूबियों से भरपूर है। लेकिन इसे उचित मात्रा में ही लेना चाहिए। इसके इस्तेमाल में कुछ सावधानियाँ भी रखें।लहसुन की तासीर काफी गर्म और खुश्क होती है कुछ लोगों को यह रास नहीं आता। खासकर गर्मी के मौसम में पित्त प्रधान प्रकृति वाले इसका इस्तेमाल संतुलित ही करें।अगर लहसुन का कुछ दुष्प्रभाव महसूस हो तो मरीज को गोंद कतीरा, धनिया, बादाम-रोगन, नींबू, पुदीना देते रहने से उसका दुष्प्रभाव कम  हो जाता है।घी में भून लेने से भी यह दोष रहित होती है। बीमारी की हालत में किसी विशेषग्य की सलाह ले इसकी मात्रा एवं परहेज पर विशेष ध्यान रखें।लहसुन का प्रयोग सर्दियों में अधिक किया जाता है. गर्मी के मौसम में अधिक लहसुन खाने हाजमा खराब हो सकता है, गर्मी के मौसम में लहसुन का सेवन सीमित मात्रा में करना ही लाभदायक होता है।जंगली लहसुन आंतों को हानि पहुंचा सकती है। इसमें मौजूद सल्फर से एलर्जी महसूस करने वाले इसे न ही खाएं और न ही त्वचा पर लगाएं।एलर्जी महसूस करने वाले इसे ना खाएं और न ही त्वचा पर लगाएं।
गठिया के रोगी लाल सब्जियां न खाएं।                                                                                            
                                                                                                                  विपुल प्रताप सिंह 

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